अच्छा स्वास्थ्य महावरदान
जीवन में से अगर धन चला जाए तो समझो कुछ भी नहीं गया, परंतु स्वास्थ्य चला जाए तो सब कुछ चला जाता है- इस बात का अर्थ यह है कि जीवन में स्वास्थ्य का महत्व बहुत अधिक है।
जीवन एक दौंड
जीवन एक दौंड है ,इस दौड़ में वही जीतेगा जो शरीर की दृष्टि से इस ह्षट-पृषट होगा। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का निवास होता है ।जो शरीरिक दृष्टि से कमजोर है। वह अपने समाज पर, मां-बाप पर तथा स्वयं अपने लिए भी बोझ है। जो पूर्णतया स्वस्थ है। वह अपने साथ-साथ दूसरों का बोझ भी अपने कंधों पर उठा सकता है। अन्यथा स्थिति बदल जाती है। अस्वस्थ व्यक्ति कोई भी कार्य उचित ढंग से नहीं कर सकेगा।
विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य
विद्यार्थियों के लिए तो स्वास्थ्य का और भी अधिक महत्व है। उन्हें छोटी आयु में बहुत कुछ सीखना होता है ।अनेकों प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी योग्यता का प्रदर्शन करना है। विद्यार्थियों को केवल अपने देश के ही नहीं। विदेशी विद्यार्थियों के समक्ष भी अपने योग्यता, दक्षता का प्रदर्शन करना है। यह सब कार्य निर्बलों द्वारा संभव नहीं हो सकता। एक स्वस्थ काया ही यह सब कर सकती है। हमें भारत के भविष्य को उज्जवल करना है। देश का बोझ कमजोर कंधे नहीं उठा सकते ।उसके लिए बलशाली भुजाओं की आवश्यकता है परंतु आज हमारे सामने सिथति कुछ और ही है। आज हमारे बालक विद्यार्थी छोटी आयु में ही दुबले-पतले कमजोर हो रहे हैं। कुछ तो इतने दुर्बल हैं कि अपने बैग के बोझ से ही दोहरे हो रहे हैं। इसका क्या कारण है? आज हम अपने जीवन मूल्यों को भूल रहे हैं।
पूर्वजों का जीवन
हमारे पूर्वजों का जीवन बहुत नियमबदध था वह सुबह सवेरे उठ जाया करते थे। कई प्रकार के बलवर्धक व्यायाम किया करते थे। लंबी सैर किया करते थे परंतु आज के बच्चे व्यायाम करने में विश्वास नहीं करते। भले 'हेल्थ क्लब' के सदस्य बनकर अपने पैसे का दिखावा करते हैं। हम यह बात क्यों भूल जाते हैं कि व्यायाम शरीर के लिए वरदान है। स्वास्थ्य शरीर का एक हिस्सा है। अपने बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए हमें उन में सुबह जागने और व्यायाम के लिए प्रेरित करना चाहिए।
आज के बच्चों के खाने पीने की आदतें
आज के बच्चों के खाने पीने की आदतें बहुत बिगड़ चुकी हैं। वह दूध और उस से बनी वस्तुओं के महत्व को भूल चुके हैं। भोजन में अन्न का महत्व नहीं समझ पाते। हरी सब्जियों ,दालों से उन्हें चिढ़ है ।जो कि हल्के-फुल्के भारतीय खाद्य पदार्थ हैं। आज के बच्चों पर चाइनीस फूड नूडल्स ,हॉट डॉग, सॉफ्ट ड्रिंक का भूत सवार है। या खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए अभिशाप है।
युवा पीढ़ी कई प्रकार के नशों की शिकार
आज की युवा पीढ़ी कई प्रकार के नशों की शिकार हो चुकी है। धूम्रपान तंबाकू भोग विलास की वस्तु का अधिक से अधिक प्रयोग करके अपना स्वास्थ्य नष्ट कर रहे हैं और अपने पैसों की भी बर्बादी कर रहे हैं। यही पैसा यदि वह अच्छे भोजन की व्यवस्था करने में खर्च करें। तो वह उत्तम स्वास्थ्य के स्वामी बन सकेंगे।
अच्छा स्वास्थ्य भगवान की देन
अच्छा स्वास्थ्य भगवान की देन है। जिसकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य है। जिसका स्वास्थ्य ठीक नहीं। उससे पूछिए कि स्वास्थ्य की क्या कीमत है उसका जीवन नर्क से भी बुरा है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन को संतुलित बनाना होगा। अपनी दिनचर्या निश्चित करनी होगी। भोजन में विटामिन, प्रोटीन, फैट का ध्यान रखना चाहिए। याद रखें सदा अपनी भूख से थोड़ा कम खाए। ठुसठुस कर खाने से चर्बी बढ़ जाती है। तोंद निकल आती है। वजन बढ़ जाता है। जिससे अनेक बीमारियों का जन्म होता है।
सेहत के लिए हानिकारक
आलस सभी सेहत के लिए हानिकारक है। अतः जीवन में फुर्ती होनी चाहिए परंतु भागदौड़ से बचना चाहिए। दिखावे से बचें। टी.वी कम देखें। अगर देखें तो कम से कम 3 गज की दूरी से देखें। इसे आंखों पर कम जोर पड़ेगा। पढ़ते समय कमरे में प्रकाश की व्यवस्था ठीक होनी चाहिए। अपना हर काम स्वयं अपने हाथों से करें। इससे मन आनंदित होता है। जो स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम है। स्वस्थ मन से शरीर में स्वस्थ रक्त प्रवाहित होता है।
स्कूल में बच्चों के डॉक्टरी परीक्षण
हर स्कूल में बच्चों के डॉक्टरी परीक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। यहां महीने में एक बार बच्चों का डॉक्टरी परीक्षण हो। बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया जाए। उन्हें अपने शरीर एक सफाई का ध्यान रखना सिखाया जाए तथा आंखें, नाक, कान, दातों, हाथों, पैरों की सफाई रखने का परीक्षण दिया जाए। अच्छा स्वास्थ्य महा वरदान है। इसके लिए रसोई घर साफ स्वच्छ होना चाहिए। खाने की हर वस्तु को ढक कर रखें। किसी भी प्रकार का जीव जंतु रसोई में न आने दे। एक स्वस्थ व्यक्ति ही इस सुंदर संसार में आनंदमया जीवन जी सकता है।
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प्रकृति में मनुष्य ही सबसे अधिक बुद्धिमान प्राणी
प्रकृति में मनुष्य ही सबसे अधिक बुद्धिमान प्राणी है। वही अपने शरीर का तथा स्वास्थ्य का महत्व समझता है। प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है। उसका संतुलित प्रयोग करके हमें स्वयं को इस प्रकृति का एक अंग बनाना है। जीवन मूल्यवान है। स्वास्थ्य उससे भी अधिक मूल्यवान है ।जरा सा स्वास्थ्य बिगड़ने से जीवन नर्क हो जाता है। अतः स्पष्ट है हमारा स्वास्थ्य हमारे लिए महा वरदान है।
स्वास्थ्य के लिए व्यायाम
स्वास्थ्य की रक्षा
व्यायाम के प्रकार
कहा जाता है। कोई सुबह दौड़ लगाना पसंद करता है। तो कोई बंद कमरे में दंड बैठक लगाना तथा मालिश करके अपने शरीर को स्वस्थ बनाए रखने का प्रयत्न करता है। कोई घुड़दौड़ लगाना तथा कोई नदी के स्वच्छ पानी में सांस रोककर तैराकी द्वारा स्वास्थ्य लाभ करता है। कई भारतीय खेल जैसे कबड्डी, रस्साकशी आदि और कई पाश्चात्य खेलों जैसे- फुटबॉल, बालीवाल, हॉकी ,टेनिस, बैडमिंटन, स्केटिंग आदि खेल- खेल कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते हैं। प्राचीन काल में स्त्रियां चक्की चला कर अथवा घर का सारा काम स्वयं करके व्यायाम
द्वारा स्वस्थ रहती थी। जबकि आजकल कि स्त्रियां ऐसा ना करके अनेकों रोगों जैसे ब्लड- प्रेशर और शुगर आदि की शिकार हो जाती हैं।

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