पेड़ पौधे और हमारा जीवन (Trees And Our Life)
पेड़ पौधे धरती का सौंदर्य है। सारी धरती पेड़-पौधों की हरियाली से ही हरी-भरी रंग बिरंगी तथा सुंदर दिखाई देती है। मखमली घास वाले पहाड़ी प्रदेश, प्रत्येक मौसम में खेलने वाले रंग बिरंगे फूल निश्चय ही मन मोह लेते हैं। घने जंगलों की हरियाली से हृदय खिल उठता है। सूर्य की तेज गर्मी से बचने के लिए मनुष्य ने शीतल छाया देने वाले बड़े-बड़े वृक्षों का सहारा लिया ।उसने घने वृक्षों की छाया में झोपड़ी बनाकर अपने को तथा अपने परिवार को आंधी, तूफान और वर्षा से बचाया।
भारतीय सभ्यता और संस्कृति
भारतीय सभ्यता और संस्कृति में वृक्षों में देवताओं की झलक देखी जाती है। उन्हें गर्मी ,सर्दी से उसी प्रकार बचाया जाता है जिस प्रकार माता-पिता अपने बच्चे की रक्षा करते हैं। पीपल वृक्ष की पूजा एक देवता के समान होती है। उसको जल चढ़ाया जाता है और स्त्रियां उसकी परिक्रमा करके अपना मनोवांछित फल प्राप्त करती हैं। केले के वृक्ष का पूजन भी शास्त्रों में लिखा मिलता है। तुलसी के पौधे की पूजा उतना ही महत्व रखती है जितने की भगवान की पूजा ।नीम जो कि सब प्रकार के रोगों को दूर करने वाला वाली है, को भक्ति भाव से प्रणाम किया जाता है। हरे-भरे वृक्षों को काटना प्राचीन समय में अपराध समझा जाता था और साथ ही उस अपराध के लिए दंड की व्यवस्था भी थी।
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मनुष्य के जीवन में रहन-सहन का परिवर्तन
ज्यों-ज्यों मनुष्य के जीवन में रहन-सहन का परिवर्तन आया, विज्ञान में उन्नति की पुरानी मान्यताएं लुप्त होने लगी। जनसंख्या की वृद्धि के कारण खेत खलियानओं की जगह पर नए- नए मकान बनने लगे ।पेड़-पौधों को काटा जाने लगा। पेड़ पौधों वाली जगह ने मकानों और कारखानों का स्थान ले लिया ।सैनिकों की बढ़ती संख्या तथा पुलिस बलों की अधिकता के कारण सैनिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए भी पेड़ पौधों को काटकर सैनिक अड्डों का निर्माण किया गया।
वृक्षों का तेजी से काटा जाना
वृक्षों का लगातार कटना
वृक्षों के लगातार कटने तथा ईधन की आवश्यकता को देखते हुए 1950 में भारत सरकार ने वन महोत्सव योजना का शुभारंभ किया। अब देशभर में वृक्षारोपण का कार्यक्रम व्यापक रूप से चलाया जा रहा है ।केंद्र सरकार ने सभी राज्यों की सरकारों को यह कड़ी निर्देश दिए हैं कि केंद्र सरकार की आज्ञा के बिना किसी भी जंगल को साफ नहीं करने दिया जाएगा और साथ ही केंद्रीय कृषि एवं सिंचाई मंत्रालय के वन विभाग के महानिरीक्षक की भी आज्ञा प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
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वृक्षों के अनेक लाभ
वृक्षों से मनुष्य को अनेक लाभ हैं। सूर्य के प्रकाश में वृक्ष अत्याधिक मात्रा में ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं जिससे वातावरण की शुद्धि होती है। मनुष्य का स्वास्थ्य ठीक रहता है। वृक्षों से तापमान का नियंत्रण होता है। वृक्षों से हमें भयानक से भयानक रोगों को दूर करने वाली औषधियां प्राप्त होती है। पेड़ पौधे हमें सस्ता इंदन, जहाज कारखाने एवं घर बनाने की लकड़ी और गर्मी में सुख छाया प्रदान करते हैं। वृक्षों से जलने वाले सूखे पत्ते खाद का काम करते हैं जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। वृक्षों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वृक्ष वर्षा करवाने में सहायक सिद्ध होते हैं। वृक्षों के अभाव में वर्षा न होने से अन्न के उत्पादन में कमी हो सकती है। वृक्षों की पत्तियां पशुओं के चारे के रूप में काम में लाई जाती हैं।कागज बनाने के लिए वृक्षों से ही हमें कच्चा माल प्राप्त होता है।
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पेड़ पौधों से हमें नैतिक शिक्षा
पेड़ पौधों से हमें नैतिक शिक्षा भी मिलती है कि किस प्रकार गर्मी, सर्दी, वर्षा तथा हिमपात सहन करता हुआ भी वृक्ष कभी धैर्य नहीं खोता। एक दिन ऐसा भी आता है जब उसके सारे पत्ते झड़ जाते हैं परंतु वह फिर भी निराश नहीं होता क्योंकि वह शायद यही सोचता है- if winter comes can spring be far behind . और फिर एक दिन बसंत आता है ।उस पर फिर आशा के फूल खिलते हैं और वह फिर हरा भरा हो जाता है।
हंसमुख प्रसन्न सिखलात, पलभर है जो हंस पाओ।
अपने डर के सौरभ से, जग का आंगन भर जाओ।
अर्थात हंसते हुए फूल हमें यह शिक्षा देते हैं कि चाहे हमारा जीवन थोड़ा ही क्यों न हो परंतु फिर भी अपने प्यार से सारे संसार में खुशियां बिखेर दो।
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पेड़ पौधों का हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान
पेड़ पौधों का हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है ।यहां एक और पेड़ पौधों को सरंक्षण देने के लिए सरकार कठोरता के साथ वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रही है ।वहां लोगों का भी यह कर्तव्य है कि वह भी देश की उन्नति में अपना योगदान दें। यदि कहीं से एक वृक्ष काटा जाता है तो वहां और पेड़ अवश्य लगाएं क्योंकि वृक्ष वायु प्रदूषण को रोकने में भी हमारे सहायक हैं। अब प्रत्येक व्यक्ति वृक्ष लगाने के अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक हो गया है। इसलिए हमें वृक्षों के विकास के लिए प्रयत्नशील होना चाहिए।
वनमहोत्सव अथवा वृक्षारोपण
मनुष्य का प्रकृति के साथ गहरा संबंध है। अनादि काल से ही मनुष्य प्रकृति की गोद में खेल कूद कर बड़ा हुआ है। हिंसक पशुओं की मार से अपने आप को बचाने के लिए उसने वृक्षों का सहारा लिया। वनों में रहते हुए वृक्षों के मीठे मीठे फलों का रसास्वादन करके अपनी भूख को मिटाया। अपने आप को गर्मी तथा वर्षा से बचाने के लिए उसने वृक्षों का ही सहारा लिया ।श्री राम जी ने भी बनवास के दिनों में माता सीता और लक्ष्मण के साथ पंचवटी नामक स्थान में पर्णकुटी बनाकर 14 साल का लंबा जीवन वहीं बिताया।
पेड़ पौधों से मनुष्य को अनेक प्रकार के लाभ हैं जैसे:
1. वातावरण को शुद्ध करना
वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं वह कार्बन डाइऑक्साइड तथा कारखानों से निकली अन्य विषैली गैसों को ऑक्सीजन में परिवर्तित करके मानव को जीवन दान देते हैं इस प्रकार वृक्ष हवा को स्वच्छ रखने में सहायता देते हैं और स्वच्छ वायु से ही हम स्वस्थ जीवन जी सकते हैं
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2.पृथ्वी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाना
वृक्षों की अधिकता पृथ्वी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होती है भारत एक कृषि प्रधान देश है कृषि के लिए जल की बहुत ही आवश्यकता होती है सिंचाई का सबसे उत्तम स्रोत वर्षा ही है वर्षा के जल की तुलना में नदियों नालों झरनो ट्यूबलर के जल का कोई महत्व नहीं है इनके अभाव की पूर्ति भी वर्षा ही करती है वर्षा लाने में वृक्षों का महत्वपूर्ण योगदान है वृक्ष वर्षा के पानी को चूस कर उसे धरती की भीतरी परतों तक पहुंचा देते हैं जिससे पृथ्वी की उपजाऊ शक्ति में वृद्धि होती है
3. आंखों के लिए लाभदायक
वृक्षों की हरियाली आंखों के लिए अत्यंत लाभकारी होती है इससे आंखों की ज्योति बढ़ती है इसी कारण जीवन में हरे रंग को बहुत महत्व दिया जाता है वृक्षों की छाल तथा कई प्रकार की जड़ी बूटियों से कई प्रकार की दवाइयों का निर्माण किया जाता है जिससे मनुष्य रहो निरोग रहता है
4. वनों के अन्य लाभ
वृक्षों से हमें जलाने के लिए ईंधन तथा इमारती लकड़ी मिलती है। लकड़ी से अनेक प्रकार का फर्नीचर बनता है ।घरों के दरवाजे तथा खिड़कियां रोशनदान आदि के लिए भी इमारती लकड़ी का प्रयोग होता है ।लकड़ी से कई प्रकार के खिलौने भी बनाए जाते हैं।
वृक्षों के आधार जीवन में रोजगार
वृक्षों के आधार पर ही कई लोगों को जीवन में रोजगार मिलता है। कई व्यक्ति लकड़ी को जलाकर कोयला बनाते हैं और कई कोयले का व्यापार करते हैं। कई लोग लकड़ी का व्यापार करते हैं ।
5. पूजा के रूप में वृक्ष
वृक्षों के महत्व एवं गौरव को समझते हुए हमारे पूर्वजों ने इनकी पूजा-अर्चना पर बल दिया है। पीपल ,तुलसी, बरगद की पूजा इस तथ्य का जीता जागता प्रमाण है। पीपल को काटना पाप समझा जाता है। इससे वृक्ष संपत्ति की रक्षा का भाव प्रकट होता है ।तुलसी के पौधे में भी अनेक प्रकार के औषधीय गुण हैं। यह पौधा विष्णु प्रिया भी कहलाता है ।इसलिए लोग इसके पास दीया जलाकर इसकी पूजा करते हैं।
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पृथ्वी पर वृक्षों की अनुपम सुंदरता
पृथ्वी पर वृक्षों की अनुपम सुंदरता नव्या विराम दृश्य प्रस्तुत करती है। वृक्षों से धरती हरी भरी रहती है। हम अपने आंगन में छोटे छोटे पेड़ पौधे लगाते हैं। उनकी हरियाली और कोमलता हमें मंत्रमुग्ध कर देती है ।वृक्षों पर वास करने वाले पक्षियों की ध्वनियां कलरव वातावरण में एक संगीत सा पैदा कर देता है।
वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के कारण
वृक्षों की अंधाधुंध कटाई के कारण दुर्भाग्य से हमारे देश में आज केवल 25% रह गई हैं। वृक्षों की वृद्धि के लिए ही वन महाउत्सव का आंदोलन शुरू किया गया है ।वनों की सुरक्षा और उनकी उन्नति के लिए 1982 में एक प्रस्ताव पास करके यह मांग की गई कि समस्त क्षेत्रफल के एक तिहाई भाग में वनों एवं वृक्षों को लगाया जाए परंतु जैसे-जैसे उद्योगों का विकास होता जा रहा है। वृक्ष कटते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में वन सरंक्षण की अति आवश्यकता है इसके लिए प्रत्येक भारतवासी को चाहिए कि वह अपने घरों, गली, मोहल्लों में अधिक से अधिक वृक्ष लगाए। सरकार का यह कर्तव्य बनता है कि सड़कों के किनारों पर छायादार वृक्ष लगाए। बंजर पड़ी जमीन और नंगी पहाड़ियों पर भी अधिक से अधिक वृक्ष लगाए और उनकी उचित देखभाल भी करें।
वृक्ष या वन हमारे देश की अमूल्य संपत्ति
वृक्ष या वन हमारे देश की अमूल्य संपत्ति है। वृक्ष मनुष्य को शीतल छाया प्रदान कर गर्मी से बचाते हैं। वृक्ष हमारे जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है। प्राणी मात्र जीवन वृक्षों पर ही निर्भर करता है। इसलिए मानव जीवन तथा प्राणी समाज को बचाने के लिए तथा वातावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रत्येक भारतवासी को उनके सरंक्षण एवं उनकी वृद्धि के लिए सहयोग देना चाहिए तथा अधिक से अधिक पेड़ पौधे स्वयं लगाने चाहिए तथा अन्य लोगों को भी प्रेरित करना चाहिए।
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