साक्षरता अभियान अथवा नवभारत साक्षरता प्रोग्राम(Literacy Campaign Or Navbharat Literacy Program)
आज सारे देश में साक्षरता अभियान की होड़ लगी हुई है। सबके मन में एक ही बात बार-बार आती है- जो व्यक्ति अनपढ़ है चलो उनको पढ़ाएँ और ऐसे लोगों के लिए कुछ कर दिखाएं। यह अभियान और भी अधिक गतिशील तब से हो गया है ।जब से सुदूर दक्षिण के केरल प्रांत ने शत-प्रतिशत साक्षरता प्राप्त कर ली है। तब से ही अनेकों प्रांतों में पूर्ण साक्षरता के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत में साक्षरता की दर केवल 19% थी। आज साक्षरता कुछ बड़ी अवश्य है परंतु आज भी करोड़ों भारतीय निरक्षर हैं और उनके लिए काला अक्षर भैंस के बराबर है।
अंग्रेजी में एक कहावत है- "अज्ञानता में ही परमानंद" है (Ignorance is a bliss)। कहने का भाव यह है कि मूर्ख और अज्ञानी व्यक्ति को किसी प्रकार की चिंता व्याप्त नहीं होती और न ही उसे कुछ सोचने समझने की आवश्यकता होती है। जबकि समझदार और बुद्धिमान व्यक्ति के लिए संसार में पग-पग पर ठोकरें हैं, चिंताएं हैं उलझनें हैै। मूर्ख व्यक्ति को न तो अपने कर्तव्य तथा अकर्तव्य की चिंता सताती है,न समाज की चिंता होती है न ही अपने देश की। इस भाव को महाकवि ने इस प्रकार व्यक्त किया है-" सब तो भले विमूड जिनहें न व्यापै जगत गति" भाव सबसे अच्छे मूर्ख होते हैं जिन्हें सांसारिक सुख दुख या चिंताएं नहीं सताती "।
मनुष्य का सबसे बड़ा दुर्भाग्य
निरक्षर या अनपढ़ होना मनुष्य का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। निरक्षर व्यक्ति ज्ञान-विज्ञान के विशाल भंडार से वंचित रह जाता है। निरक्षर व्यक्ति इस संसार में उस अंधे व्यक्ति के समान जीवित रहता है जबकि मार्ग में मोती बिखरे रहते हैं परंतु वह उन्हें देखने में असमर्थ रहता है क्योंकि उसकी आंखों में ज्ञान का प्रकाश नहीं होता ।निरक्षर व्यक्ति का जीवन वैसा ही है जैसे पंखहीन पक्षी और जल बिना मछली का।
अपने गुणों और कर्मों के कारण शिक्षा
हमारे यहां समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने गुणों और कर्मों के कारण शिक्षा प्राप्त करता था ।समाज और शासन की ओर से उसके लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था थी। यही कारण था कि भारत शिक्षा के क्षेत्र में अन्य देशों का गुरु माना जाता था परंतु जैसे ही अंग्रेजों ने भारत में शासन की बागडोर संभाली। उन्होंने सबसे प्रथम कार्यालय किया कि देश की भाषा तथा साहित्य को समाप्त करना शुरू कर दिया क्योंकि अंग्रेज जानते थे जितने लोग भारत में अनपढ़ होंगे उतना ही उनका शासन मजबूत होगा और अधिक देर तक शासन चला पाएंगे। धीरे-धीरे इन का इतना असर होने लगा कि भारत में 'अंगूठा छाप' होने लगे और उनकी संख्या 99% तक पहुंच गई है।
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अशिक्षित व्यक्ति
अशिक्षित व्यक्ति न अपने घर का वातावरण ठीक कर सकता है और न ही अपने बच्चों का भविष्य बना सकता है। वह न आतम कल्याण कर सकता है और न ही राष्ट्र कल्याण। अशिक्षा के कारण न हम अपना व्यापार बढ़ा सकते हैं और न ही औद्योगिक विकास की ओर अग्रसर हो सकते हैं। निरक्षरता इस कदर बढ़ी कि लोग अपना नाम तक न लिख सकते थे और न पढ़ सकते थे निरक्षरता इस कदर बढ़ी कि लोग अपना नाम तक न लिख सकते थे और न पढ़ सकते थे। बेचारे अंगूठा लगाकर ही अपना काम चलाते थे ।इस बात का लाभ जमीदार और साहूकार खूब उठाते थे।वह अपनी मर्जी से जो चाहे लिख देते थे। चाहे एक हजार के दस हजार कर ले या एक बीघे के दस बीघे।
निरक्षरता एक अभिशाप है।
निरक्षरता एक अभिशाप है। इसे मिटाने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाने की आवश्यकता है। साक्षरता अभियान केवल सरकार के सहारे नहीं चल सकता। इस कार्य को चलाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को भी आगे आना चाहिए। इसके साथ-साथ प्रौढ़ शिक्षा का भी प्रचार तथा प्रसार होना चाहिए बड़ी आयु के नर नारियों को शिक्षा देना आसान नहीं है ।शिक्षित युवकों को देश के महान नेताओं ने देश के सम्मुख या लक्ष्य रखा था। 'प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक व्यक्ति को शिक्षित करें' Each one teach one हमें चाहिए कि हम इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उसे व्यवहारिक रूप दे और अपने महान नेताओं के स्वपन को साकार करें।
परिचय:
भारत में साक्षरता एक प्रमुख चिंता का विषय है। नवीनतम जनगणना के अनुसार, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच महत्वपूर्ण अंतर के साथ, भारत में साक्षरता दर 77.7% है।इस समस्या से निपटने के लिए देश में कई साक्षरता कार्यक्रम लागू किए गए हैं।ऐसा ही एक कार्यक्रम नवभारत साक्षरता कार्यक्रम है जो भारत में ग्रामीण क्षेत्रों की साक्षरता दर में सुधार करने में मदद कर रहा है।
पृष्ठभूमि:
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम 1991 में भारत के प्रमुख मीडिया घरानों में से एक टाइम्स ग्रुप द्वारा शुरू किया गया था।कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण भारत में साक्षरता को बढ़ावा देना था जो साक्षरता दर के मामले में शहरी भारत से पीछे था।इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के दूरस्थ कोनों तक पहुंँचना और लोगों को साक्षरता के महत्व के बारे में शिक्षित करना था।
कार्यक्रम का प्रारंभिक ध्यान वयस्क साक्षरता पर था और इसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और उड़ीसा जैसे राज्यों में लागू किया गया था। इन राज्यों में कार्यक्रम की सफलता ने पूरे देश में इसका विस्तार किया। वर्षों से कार्यक्रम बच्चों की शिक्षा को भी शामिल करने के लिए विकसित हुआ है।
कार्यक्रम विवरण:
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम स्वयंसेवकों के एक नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है जिन्हें गांँवों में साक्षरता कक्षाएं संचालित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। कार्यक्रम के स्वयंसेवक आम तौर पर स्थानीय होते हैं। जो स्थानीय भाषा और संस्कृति से परिचित होते हैं।यह स्वयंसेवकों और ग्रामीणों के बीच विश्वास बनाने में मदद करता है। जिससे ज्ञान प्रदान करना आसान हो जाता है।
पाठ्यक्रम सरल और समझने में आसान
कार्यक्रम का पाठ्यक्रम सरल और समझने में आसान होने के लिए डिज़ाइन किया गया है।इसमें बुनियादी साक्षरता कौशल जैसे पढ़ना, लिखना और अंकगणित शामिल हैं। पाठ्यक्रम में स्वास्थ्य, स्वच्छता और वित्तीय साक्षरता जैसे जीवन कौशल भी शामिल हैं। कार्यक्रम के स्वयंसेवक सीखने की प्रक्रिया को आकर्षक और मजेदार बनाने के लिए ऑडियो-विजुअल एड्स सहित विभिन्न प्रकार की शिक्षण विधियों का उपयोग करते हैं।
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम स्थानीय गैर सरकारी संगठनों, सरकारी एजेंसियों और अन्य संगठनों के साथ साझेदारी में कार्यान्वित किया जाता है।ये साझेदारियाँ यह सुनिश्चित करने में मदद करती हैं कि कार्यक्रम अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे।कार्यक्रम स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर उनकी जरूरतों को समझने और उसके अनुसार अपने दृष्टिकोण को तैयार करने के लिए भी काम करता है।
नव भारत साक्षरता अभियान
नई शिक्षा नीति 2020 में प्रौढ़ शिक्षा को लेकर सिफारिशें की गई थी इसके अलावा बजट में भी कहा था कि भारत में एक यूनिवर्सल लिटरेसी को प्राप्त करने के लिए यानि सार्वभौमिक साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और प्रौढ़ शिक्षा को साकार करने के लिए भारत सरकार एक कार्यक्रम लेकर आएगी और इन्हीं सिफारिशों के कारण सरकार एक साक्षरता प्रोग्राम लेकर आई है।
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नवभारत साक्षरता कार्यक्रम
सबसे पहले इस कार्यक्रम में बताया गया है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2022- 27 के लिए प्रौढ़ शिक्षा की नई योजना 'नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' को दी है मंजूरी।
"नवभारत साक्षरता कार्यक्रम" की अनुमानित कुल लागत 1036.90 करोड रुपए है। जिसमें वित्त वर्ष 2022- 27 के लिए क्रमश 700 करोड रुपए का केंद्रीय हिस्सा और 337.90 करोड रुपए का राज्य हिस्सा शामिल है।
यह कार्यक्रम 2022 से शुरू होकर 2027 तक चलेगा।
इसमें यह भी बताया गया है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों का हिस्सा अलग -अलग होगा।
1.हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा एक "नवभारत साक्षरता कार्यक्रम"(NILP)New India Literacy Programme को एक केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में मंजूरी दी गई है।
2. कार्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और 2021-22 की बजट घोषणाओं के अनुरूप व्यस्क शिक्षा के सभी पहलुओं को कवर करने के लिए वित्त वर्ष 2022-27 की अवधि के लिए मंजूरी दी गई है।
3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रौढ़ शिक्षा और आजीवन सीखने की सिफारिशें भी शामिल है।
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के उद्देश्य
भारत में शिक्षित उस व्यक्ति उसको कहा जाता है जिसकी आयु 7 वर्ष या उससे ऊपर हो और वह किसी एक भाषा को पढ़ सकता हो, लिख सकता हो और एक भाषा को अच्छी तरह से जानता हो। उसको भारत में साक्षर माना जाता है।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में गैर साक्षर लोगों के बीच साक्षरता को बढ़ावा देने में सहायता करना है।
योजना का उद्देश्य न केवल आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक का प्रदान करना है बल्कि 21वीं सदी के नागरिक के लिए अवश्य आवश्यक अन्य घटकों को भी शामिल करना है। जैसे- महत्वपूर्ण जीवन कौशल, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, वाणिज्य कौशल, व्यवसाई कौशल, बुनियादी शिक्षा और शिक्षा (कला, विज्ञान, औद्योगिक संस्कृति, खेल और मनोरंजन जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल पर अधिक उन्नत सामगरी सहित)।
भारत में पहले समय उस व्यक्ति को शिक्षित माना
भारत में पहले समय उस व्यक्ति को शिक्षित माना जाता था। जिस व्यक्ति को पढ़ना, लिखना आता था तो उस व्यक्ति को शिक्षित व्यक्ति कहा जाता था लेकिन आज समय बदल चुका है ।आज के समय में यदि आप एक अच्छा जीवन व्यतीत करना चाहते हैं तो आपको केवल पढ़ना लिखना ही नही आना चाहिए बल्कि जो डिजिटल लिटरेसी है। आपको उसका भी अच्छे से ज्ञान होना चाहिए। जैसे -किसी बैंक में जाकर फॉर्म भरना, ए.टी.एम से पैसे वगैरह निकालना, स्मार्टफोन को चलाना आना, किसी योजना के लिए केवाईसी कराना है तो वह कैसे करवाना है इत्यादि उसकी आपको जानकारी होनी चाहिए। ऐसी बहुत सी जरूरतें(चीजें) हैं जिनकी आपको जानकारी होनी चाहिए। तो आपको अपना ऐसा व्यक्तित्व बनाना चाहिए जो न सिर्फ पढ़ना लिखना जानता हो बलकि वह अन्य चीजों के बारे में भी जानता हो।उसने अपने व्यक्तित्व में समय के अनुसार बदलाव किया हो ।आप के पास कोई ऐसा एक कौशल होना चाहिए जो आप को आज के समय में रोजगार दिलाने में सहायक हो।
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सरकार यह बात अच्छी तरह जानती है
सरकार यह बात अच्छी तरह जानती है कि कि व्यक्ति को पढ़ाई लिखाई के साथ व्यवहारिक शिक्षा भी देना अनिवार्य है। जो बदलते समय में उसे रोजगार दिलाने में सहायक हो। इसलिए सरकार ने डिजिटल साक्षरता, बुनियादी साक्षरता, व्यवहारिक कौशल वित्तीय साक्षरता इतयादि
कार्यक्रम कार्यान्वयन
योजना को ऑनलाइन मोड़ के माध्यम से स्वयं सेवा के माध्यम से लागू किया जाएगा। स्वयं सेवकों के प्रशिक्षण अभिविन्यास कार्यशाला का आयोजन आमने-सामने मोड़ के माध्यम से किया जा सकता है।
आसान पहुंच के लिए सभी सामग्री और संस्थान आसानी से सुलभ डिजिटल मोड, जैसे- टी वी, रेडियो, सेल फोन-आधारित फ्री/ ओपन सोर्स ऐप/ पोर्टल आदि के माध्यम से पंजीकृत स्वयंसेवकों तक डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे।
लक्षित वर्ग
यह योजना देश के सभी राज्यों /केंद्रशासित प्रदेशों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के गैर- अक्षर लोगों को कवर करें कि वित्त वर्ष 2022- 27 के लिए आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता का लक्ष्य राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, एनसीआरटी और एनआईओएस के सहयोग से "ऑनलाइन अध्यापक, शिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली और पीएलएएस)" का प्रयोग करके प्रतिवर्ष 1.00 करोड की दर से 5 करोड़ शिक्षार्थियों का लक्ष्य रखा गया है।
पढ़ना लिखना अभियान की जगह पर अब "नवभारत साक्षरता कार्यक्रम"
पढ़ना लिखना अभियान की जगह पर अब "नवभारत साक्षरता कार्यक्रम" का अनुमानित कुल परिव्यय 1037.90 करोड रुपए है जिसमें वित्त वर्ष 2022-27 केे लिए क्रमश 7 करोड रुपए का केनदरिय हिससा और 337.90 करोड रुपए का राज्य हिस्सा शामिल है।
देश में 2030 तक सभी होंगे साक्षर।100% लिटरेसी के लिए अगस्त से शुरू होगा। "नवभारत शिक्षा का कार्यक्रम"।
जुलाई 2021 में पढ़ना लिखना ध्यान समाप्त हो गया और उसके स्थान पर नव भारत साक्षरता अभियान शुरू किया गया। यह कार्यक्रम केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया जा रहा है लेकिन इस कार्यक्रम में राज्यों को भी अपना सहयोग हिस्सा देना होगा।
योजना की मुख्य विशेषताएं
1.स्कूल इस योजना के किर्यान्वयन की इकाई होगा।
2. विभिन्न आयु समूहों के लिए अलग-अलग रणनीति अपनाई जाएगी।
3.नवोनमेषी गतिविधियों को शुरू करना करने के लिए राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों को लचीलापन प्रदान किया जाएगा।
4.नए-नए तरीके अपनाए जाएंगे गतिविधियों को शुरू करने के लिए।
5.राज्यों /केंद्रशासित प्रदेशों को लचीलापन प्रदान किया जाएगा ।मतलब यह है कि राज्य अपने तरीके से भी इन गतिविधियों को लागू कर सकते हैं।
6.योजना के व्यापक कवरेज के लिए प्रोड शिक्षा प्रदान करने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाएगा
7.राज्य /केंद्रशासित प्रदेश और जिला स्तर के लिए 'प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स' (पीजीआई) 'यूडीआईएसई पोर्टल' के माध्यम से भौतिक और वित्तीय प्रगति दोनों के बीच संतुलन कायम करते हुए वार्षिक आधार पर योजना और उपलब्धियों को लागू करने के लिए राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन को दिखाया जाएगा।
साक्षरता में प्राथमिकता और पूर्ण साक्षरता 15- 35 आयु वर्ग को पहले पूर्ण रूप से और उसके बाद 35 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को साक्षर किया जाएगा। नीति आयोग के तहत सभी आकांक्षी जिलों राष्ट्रीय राज्य और सबसे कम साक्षरता दर वाले जिलों 2011 की जनगणना के अनुसार 60 से कम महिला साक्षरता दर वाले जिले अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति/ अल्पसंख्यक की अधिक जनसंख्या, शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉक, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों/ ब्लॉकों पर ध्यान दिया जाएगा।
यूडीआईएसई के तहत पंजीकृत लगभग 7 लाख स्कूलों के 3 करोड छात्र/ बच्चे के साथ-साथ सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के लगभग 50 लाख शिक्षक स्वयंसेवक के रूप में भाग लेंगे।
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सभी के लिए शिक्षा
एक प्रगतिशील कदम के रूप में, यह भी निर्णय लिया गया है कि अब से "प्रौढ़ शिक्षा" के स्थान पर "सभी के लिए शिक्षा" शब्द का प्रयोग किया जाएगा। मंत्रालय इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि "प्रोड शिक्षा" शब्दावली में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के सभी गैर साक्षरों को उचित रूप से शामिल नहीं किया जा रहा है।
नव भारत साक्षरता अभियान की आवश्यकता
2011 की जनगणना के अनुसार देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में गैर साक्षर की कुल संख्या 25.76 करोड़ (पुरुष 9.08 करोड़,महिला 16.68 करोड़ है)।
साथ ही 2009-10 से 2017-2018 के दौरान साक्षर भारत कार्यक्रम के तहत साक्षर के रूप में प्रमाणित व्यक्तियों की 7.64 करोड की प्रगति को ध्यान में रखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि वर्तमान में भारत में लगभग 18.12 करोड़ से अधिक अभी भी गैर साक्षर हैं। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि जो 18.12 करोड लोग गैर-साक्षर है उनको शिक्षित करें। इसीलिए सरकार "नवभारत साक्षरता प्रोग्राम" लेकर आई है। इन प्रोग्राम में हमें सब को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए क्योंकि यह हमारी भी जिम्मेदारी है कि हमारे देश का हर एक नागरिक शिक्षित हो और हमें स्वयं सेवक बनकर इसमें सरकार का साथ देना चाहिए जिससे हमारे देश की प्रगति हो सके और भारत का हर नागरिक
साक्षर बने।
प्रभाव:
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम का ग्रामीण भारत में लोगों के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।वर्षों से, कार्यक्रम ने हजारों लोगों को साक्षर बनने में मदद की है जिसका उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। साक्षरता ने इन लोगों के लिए नए अवसर खोले हैं, जिससे उन्हें बेहतर नौकरियों, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा तक पहुंँच बनाने में मदद मिली है।
कार्यक्रम का प्रभाव उन व्यक्तियों तक ही सीमित नहीं है जो इससे सीधे प्रभावित हुए हैं। कार्यक्रम का उन समुदायों पर भी प्रभाव पड़ा है जहां यह संचालित होता है।शिक्षित व्यक्ति अपने समुदायों में रोल मॉडल बन गए हैं, दूसरों को साक्षरता अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इससे इन समुदायों में सीखने और शिक्षा की संस्कृति पैदा हुई है। जो उनके दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनौतियां:
जहां नवभारत साक्षरता कार्यक्रम ग्रामीण भारत में साक्षरता दर में सुधार लाने में सफल रहा है वहीं इसने कई चुनौतियों का भी सामना किया है।सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक संसाधनों की कमी रही है।कार्यक्रम स्वयंसेवकों पर बहुत अधिक निर्भर करता है जो हमेशा उपलब्ध नहीं होते हैं।कार्यक्रम को संचालित करने के लिए धन की भी आवश्यकता होती है जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित करना मुश्किल हो सकता है।एक और चुनौती बुनियादी ढांचे की कमी रही है। ग्रामीण भारत के कई गांवों में बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंँच नहीं है। इससे साक्षरता कक्षाओं का संचालन करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि कोई उचित बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं है।
भारत को वास्तव में महान बनाना
यदि हम ने भारत को वास्तव में महान बनाना है तो शिक्षित व्यक्तियों को आगे आना चाहिए क्योंकि विश्व के बदलते परिदृश्य में भारत का किसी भी रूप से पिछड़ा रहना ठीक नहीं है। शिक्षित एवं साक्षर लोग ही प्रजातंत्र को सफल बना सकते हैं। साक्षरता अभियान एक व्यापक दृष्टिकोण है जिसकी सफलता उज्जवल भविष्य की ओर इशारा करती है। इसलिए आओ पढ़ाएँ,कुछ कर दिखाएं और लोगों को इस अज्ञानरूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले चले। इस योजना को चलाने वाले कार्यकर्ता चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या किसी स्वयंसेवी संस्था के उन को चाहिए कि मन लगाकर सच्ची लगन और ईमानदारी से इस कार्य को संपन्न करें
निष्कर्ष:
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम ग्रामीण भारत में साक्षरता को बढ़ावा देने में सहायक रहा है। वयस्क साक्षरता पर कार्यक्रम का फोकस व्यक्तियों और समुदायों को सशक्त बनाने में विशेष रूप से सहायक रहा है।ग्रामीण समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर कार्यक्रम का प्रभाव महत्वपूर्ण है और इसने इन समुदायों में सीखने और शिक्षा की संस्कृति बनाई है।हालांकि कार्यक्रम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है लेकिन इसने यह भी दिखाया है कि सही दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता के साथ साक्षरता में सुधार संभव है
ग्रामीण क्षेत्रों में दरें नवभारत साक्षरता कार्यक्रम इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे मीडिया संगठन समाज पर सकारात्मक प्रभाव पैदा करने के लिए अपने संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठा सकते हैं।आगे बढ़ते हुए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि नवभारत साक्षरता कार्यक्रम को समर्थन और संसाधन मिलते रहें। कार्यक्रम में ग्रामीण भारत में लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता है, और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह सुचारू रूप से और स्थायी रूप से संचालित हो सके।
इसके अलावा, भारत में साक्षरता और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ऐसी और पहलों की आवश्यकता है। देश की साक्षरता दर अभी भी वैश्विक औसत से बहुत नीचे है, और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। उन क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में अधिक साक्षरता कार्यक्रमों को लागू करने की आवश्यकता है।
अंत में भारत में साक्षरता और शिक्षा को बढ़ावा देने में मीडिया संगठनों की भूमिका को पहचानना आवश्यक है। नवभारत साक्षरता कार्यक्रम ने प्रदर्शित किया है कि मीडिया संगठन अपने संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं और समाज पर सकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं। देश में साक्षरता और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपने संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए और अधिक मीडिया संगठनों को इसी तरह की पहल करने के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।
नवभारत साक्षरता कार्यक्रम इस बात का एक शक्तिशाली उदाहरण है कि कैसे मीडिया संगठन समाज में बदलाव ला सकते हैं। कार्यक्रम ने ग्रामीण भारत में साक्षरता दर में सुधार करने में मदद की है और इन क्षेत्रों में समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। सही समर्थन और संसाधनों के साथ इस तरह के कार्यक्रम भारत में लाखों लोगों के जीवन में बदलाव लाना जारी रख सकते हैं।
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